|
३४० |
इंद्रधनुष्यात असतात सप्तरंग |
| ------- रावांच्या संसारात मी आहे दंग |
|
३४१ |
शिक्षणाने विकसीत होते संस्कारीत जीवन |
|
------- रावांच्या संसारात राखीन मी
सर्वाचे मन |
|
३४२ |
सासरी आहे माझ्या सुंदर हिरवा मळा |
| ------- रावांमुळेच लागला मला त्यांचा लळा |
|
३४३ |
मला गूणवान पती मिळाले याचा वाटतो प्रत्येकाला हेवा |
|
------- राव माझ्या जीवनातील मौल्यवान ठेवा |
|
३४४ |
आज सारे सुख माझ्या दारी दाटले |
| ------- रावांचे प्रेम अजून तरी नाही आटले |
|
३४५ |
मी नव्हती सुंदर तरी मला निवडले |
|
------- रावांचे हेच रुप मला फार आवडले |
|
३४६ |
तळहातावर मेंदी रचली, त्यावर तेलही
शिंपडले |
| ------- रावांचे मन मी केव्हाच जिंकले |
|
३४७ |
केसात माळते मी रोज गुलाबाचे फुल |
| ------- राव माफ करतात माझी प्रत्येक भुल |
|
३४८ |
पौर्णिमेचा दिवस चंद्राला लागते चाहूल |
| ------- रावांच्या जीवनात टाकते मी पहिले
पाऊल |
|
३४९ |
------- रावांच्या नावाने भरला मी हिरवा
चूडा |
| त्यांच्यावर करेन मी प्रेमाचा सडा |
|
३५० |
स्वातंत्र्याच्या होमकूंडात विरांनी घेतली
उडी |
| ------- रावांच्या नावाने घालते गळयात
मंगळसुत्राची जोडी |
|
३५१ |
नाजूक अनारसे साजूक तूपात मळावे |
| ------- रावांसारखे पती जन्मोजन्मी मिळावे |
|
३५२ |
चंदेरी सागरात रुपेरी लाटा |
| ------ रावांच्या सुखदुःखात माझा अर्धा
वाटा |
|
३५३ |
पौषातील धुंद वारा छेडितो माझ्या अंगाला |
| ------- रावांचे नाव घेते सूर्यनारायणाच्या
साक्षीला |
|
३५४ |
दीनदुबळयाचे गा-हाणे परमेश्वरांनी ऐकावे |
| ------- रावांसारखे पती मिळाले आणखी काय
मागावे |
|
३५५ |
ग्रुहकामाचे शिक्षण देते माता |
| ------ रावांचे नाव घेते तुमच्या
आग्रहाकरीता |
|
३५६ |
शरदाचे संपले अस्तित्व, वसंताची लागली
चाहूल |
| ------- रावांच्या संसारात टाकते पहिले
पाऊल |
|
३५७ |
वेळेचे कालचक्र फिरते रात्रंदिवस कधी पुनव
कधी अवस |
| ------- रावांचे नाव घेते आज आहे हळदी
कुंकवाचा दिवस |
|
३५८ |
अंगणात होती मेथी पाणी घालू किती |
| ------- रावांच्या हातात सत्यनारायणाची
पोथी |
|
३५९ |
डाळिंब ठेवले फोडून संत्र्याची काढली साल |
| ------- रावांच्या नावाने कुंकु लावते लाल |