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३०० |
डोंगरकपारी तरु लतावेली |
| ------- रावांनी दिली गुलाबाची मोहक कळी |
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३०१ |
उगवत्या रवीला उषेची ऒढ |
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------- रावांच्या संसारात लाभली -------
ची जोड |
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३०२ |
गरिबीची करु नये निंदा, श्रीमंतीचा करु
नये गर्व |
| ------- रावांच्या नावावर आर्पिले जीवन
सर्व |
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३०३ |
शिवाजीसारखा पूत्र धन्य जिजाऊची कूशी |
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------- रावांचे नाव घेते बारशाच्य़ा दिवशी |
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३०४ |
तारुण्याच्या वाटेवर बालपणाची झाली इतराजी |
| ------- रावांच्या नावाने मिळाली नवलाई
संसाराची |
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३०५ |
माहेरचे प्रेम खेचती मागे पुढे |
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------- रावांच्या साथीसाठी माहेर सोडावे लागे |
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३०६ |
प्रेमाचा दिला हुंडा मानाची केली करणी |
| ------- रावांचे नाव घेऊन करते घरभरणी |
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३०७ |
वर्षाऋतूच्या आगमनाने धरती होते हासरी |
| ------- रावांचं नाव घेते मी नवपरिणिता
लाजरी |
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३०८ |
नभांगणी चांदणीला शोभा चंद्रमाची |
| सौभाग्याच्या दानात -----ला शोभा ------
रावांची |
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३०९ |
सागराच्या लाटा उसळताना दिसती शुभ्रधवल |
| ------- रावांचे नाव घेते, त्यात काय नवल
? |
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३१० |
भावंडाचा सहवास आईवडिलांचा आशिर्वाद |
| ------- रावांचे नाव घेताना तुमचेही लाभो
आशिर्वाद |
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३११ |
प्रतिभेच्या अविष्कारातून काव्य बहरे |
| ------- रावांच्या साथीने मन माझे मोहरे |
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३१२ |
हंडयावर हंडे सात हंडे त्यावर ठेवली परात |
| ------- राव बसले दारात मी येऊ कशी घरात |
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३१३ |
कवीची कविता कवीनेच वाचावी |
| ------- रावांची प्रेमाची फुले ओंजळीत
वेचावी |
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३१४ |
दत्ताच्या फोटोला हार घालते वाकून |
| ------- रावांचे नाव घेते तुमचा मान राखून |
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३१५ |
चतूर्थीच्या दिवशी चंद्र निघाला हिरवा |
| ------- राव बसले पुजेला मी निवडते दुर्वा |
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३१६ |
गुलाबाचे फुल मधोमध पिवळे |
| ------- राव दिसतात क्रुष्णासारखे सावळे |
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३१७ |
हिमालय पर्वतातुन नदी वाहते कनिका |
| ------- रावांचे नाव घेते ------ ची
बालिका |
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३१८ |
सायकल चालते वेगाने, बस धावते क्रमाने |
| ------- रावांचे नाव घेते तूमच्या
म्हणण्याप्रमाणे |
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३१९ |
करवंदाची साल चंदनाचे खोड |
| ------- रावांचे बोलणे अम्रुतापेक्षा गोड |