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६०० |
कोजागिरी पौर्णिमा नी
शरदाचे चांदणे |
| ------- राव आहेत
सर्वात देखणे |
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६०१ |
रामाने केला शिवधनुष्य भंग |
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------- रावांच्या जीवनात झाले मी दंग |
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६०२ |
श्रीगणेशाच्या भेटीसाठी
गौरी येते नटून |
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------- रावांच्या नावाने आले माझे
सौख्य फिरुन |
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६०३ |
सागराच्या ह्रदयी अंतरंग लपले |
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------- रावांसाठी जीवन सर्वस्व अर्पिले |
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६०४ |
शशी-रजनी, रवी-उषेची
नियतीने बांधली जोडी |
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------- रावांच्या संसारात आहे प्रेमाची
गोडी |
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६०५ |
वरण भातावर धरली साजूक तूपाची धार |
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------- रावांना घास देताना तारांबळ
झाली फार |
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६०६ |
शब्द पाकळया मुक झाल्या
ओठीचे उडले स्वर |
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------- रावांबरोबर चालले सुखी होवो
माहेर |
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६०७ |
निरोपाच्या प्रागंणात
पडला स्म्रुती पुष्पाचा सडा |
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------- रावांच्या सोबत चालले घेऊन
आशिर्वादाचा घडा |
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६०८ |
चंद्रतारांगणाच्या
मेळाव्यात रजनी हसते |
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------- रावांच्या सहवासात ------- रमते |
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६०९ |
वसंत ऋतुत कोकीळा गाणे
गातात |
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------- रावांच्या सहवासात दिवस आनंदात
जातात |
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६१० |
नीलवर्ण आकाशात वीज
कडाडली ढगात |
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------- रावांच्या सहवासात धन्य झाले
मी जगात |
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६११ |
नीलवर्ण आकाशात चमकतात
चांदण्या |
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------- रावांचे नाव घेते --------- ची
कन्या |
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६१२ |
आंब्याच्या झाडाला आंबे
लागले शंभर |
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------- रावांचे नाव घेते माझा पहिला
नंबर |
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६१३ |
सोन्याची घागर
अम्रुताने भरावी |
| ------- रावांची सेवा
जन्मभर करावी |
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६१४ |
गंगा वाहे यमुना वाहे
सरस्वती झाली गुप्त |
| ------- रावांच्या पदरी
घालून आई बाबा झाले मुक्त |
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६१५ |
तुकारामाने केले अंभग,
मोरोपंतानी केली आर्या |
| ------- रावांची कन्या
झाली ------- रावांची भार्या |
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६१६ |
शिवाजी राजांची जिजाई
होती माता |
| ------- रावांचे नाव
घेऊन येते मी आता |
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६१७ |
वेंकटेशाच्या देवळाला
सोन्याचे दार |
| ------- रावांना घालते
पुष्पहार |
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६१८ |
चातक पक्षी पावसाचे
पितो पाणी |
| ------- रावांची झाली
मी राणी |
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६१९ |
चांदण्या रात्री
रातराणीचा सुवास |
| ------- रावांचे नाव
घेते खास |