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४८० |
लक्ष्मी माते वंदन करते मनी श्रध्देचे बळ |
| ------- रावांच्या संसारी दे सम्रुध्दीचे
फळ |
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४८१ |
जलाशयात असते जसे निर्मळ पाणी |
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तशीच मी ------- रावांची सहधर्मचारिणी |
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४८२ |
कोसळल्या जलधारा, धरा आनंदली रातोरात |
| -------- रावांच्या सहवासात होवो सौख्याची
बरसात |
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४८३ |
संध्याकाळी तूळशीपाशी मंद ज्योत तेवते |
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------- दिवस म्हणून ------- रावांचे नाव घेते |
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४८४ |
सर्व कार्याचा पाठीराखा विघ्नहर्ता गणेश |
| ------- राव हेच माझ्या जीविताचे परमेश |
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४८५ |
सरस्वतीच्या मंदीरात साहित्याच्य़ा राशी |
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------- रावांचे नाव घेते शुभमंगलदिवशी |
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४८६ |
दोन कुल उद्धरते कन्या एक कुल उद्धरतो
पुत्र |
| ------- रावांच्या नावाने बांधले
मंगळसुत्र |
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४८७ |
मंगल झाली प्रभात, विहंग उडले गात |
| ------- रावांच्या हाती दिला हात |
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४८८ |
संध्याकाळच्या चंदन गंधात अधिर झाली दिशा |
| -------रावांचे आयुष्य कळीकळीने उमलावे
हीच माझी मनिषा |
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४८९ |
संसार सौख्याची मनामध्ये आस |
| ------- रावांना घालते ------ चा घास |
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४९० |
राव आमचे मोठे करारी |
| म्हणून तर मी घेऊ शकले उंच भरारी |
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४९१ |
ज्याचा जसा भाव तशी भावना दिसते |
| ------- ची प्रतिमा माझ्या मनी वसते |
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४९२ |
देवाजवळ सांयकाळी करेन देवाची आरती |
| ------- राव आहेत माझ्या जीवनाचे सारथी |
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४९३ |
कपाळावर कुंकु त्याखाली हळद सजते |
| हातावरच्या मेंदीत ------- रावांचे नाव
रेखाटते |
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४९४ |
सुंदर काळेभोर केसात सजते गुलाबाचे फुल |
| ------- राव क्षमा करतात माझी प्रत्येक
भुल |
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४९५ |
प्रेम दयावे प्रेम घ्यावे प्रेमाचा असावा
साठा |
| ------- रावांच्या सुखदुःखात माझा अर्धा
वाटा |
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४९६ |
नीलवर्णी आकाशात मधुर पक्षांचा टाहो |
| ------- रावांचे नाव घेते अखंड सौभाग्य
लाभो |
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४९७ |
जाई-जुईच्या वेलीखाली हरीण घेते विसावा |
| -------- रावांचे नाव घेते
तुमचा आशिर्वान असावा |
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४९८ |
आई-वडिल करीत होते काळजी कसे मिळते घर |
| ----- रावांचे नाव घेते भाग्य माझे थोर |
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४९९ |
शुक्राची चांदणी ढगाला देते शोभा |
| ------- रावांच्या पाठीवर परमेश्वर उभा |