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४६० |
सुखाच्या शेरी चढताना दुःखाचा नाही लवलेश |
| ------- रावांसह करीते ग्रुहप्रवेश |
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४६१ |
उंबरठयावर पाय दिल्यावर लागली सूखी जीवनाची
चाहूल |
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------- रावांचे नाव घेऊन टाकते दिल्याघरी
पाऊल |
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४६२ |
मेनकेच्या पोटी जन्मली शकुंतला |
| --------- रावांचे गूण पाहून अर्पण केले
मला |
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४६३ |
गीतेतं क्रुष्णाने अर्जुनाला केला उपदेश |
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------- रावांच्या बरोबर करते ग्रुहप्रवेश |
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४६४ |
चंद्राला पाहून हर्षित होते रोहिणी |
| ------- रावांच्या जीवनात होईन मी आदर्श
ग्रुहिणी |
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४६५ |
सासर आणि माहेर स्त्रीचे दोन नेत्र |
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------- रावांच्या नावाचे बांधते मणीमंगळसुत्र |
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४६६ |
संस्क्रुत भाषेत नदीला म्हणतात सरिता |
| ------- रावांचे नाव घेते तुमच्या
आग्रहाकरीता |
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४६७ |
अम्रुतासाठी समुद्राचे झाले मंथन |
| ------- रावांचे नाव घेऊन बांधते मी कंकण |
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४६८ |
राधेच्या मनात क्रुष्णाचे चिंतन |
| ------- रावांचे नाव घेऊन
सोडते मी कंकण |
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४६९ |
चांदीच्या करंडयाला सोन्याचे झाकण |
| ------ रावांचे नाव घेऊन बांधते मी कंकण |
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४७० |
नववधुच्या करि शोभे हिरवे कंकण |
| ------ रावांचे नाव घेऊन
सोडते मी कंकण |
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४७१ |
सूनमूख पाहण्यासाठी आवश्यक असतो आरसा |
| ------- रावांना घास घालते अनारसा |
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४७२ |
राम, लक्ष्मण, हनुमान त्यांचा दास |
| ------- रावांसाठी मला निवडलं खास |
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४७३ |
नागनाथाच्या मंदीरात उदबत्तीचा वास |
| ------- रावांना घालते लाडूचा घास |
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४७४ |
ता-याचं लुकलुकणं चंद्राला आवडलं |
| ------- रावांसाठी मला निवडलं
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४७५ |
चांदीच्या तबकात मोती होऊन राहण्यापेक्षा
चातकाची भागवावी तहान |
| ------- राव पती मिळाले म्हणून माझे जीवन
झाले महान |
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४७६ |
सौभाग्यकांक्षिणी कालची झाले सुवासिनी आज |
| ------- रावांनी दिला सारा सौभाग्याचा साज |
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४७७ |
आईनी वाढवलं, वडीलांनी पढवलं |
| ------- रावांनी त्यांची होताच सोन्यानं
मढवलं |
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४७८ |
गाण्याच्य़ा मैफलीत पेटीचा सुर |
| ------- रावांची भेट म्हणजे प्रेमाचा पूर |
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४७९ |
सोन्याच्या तारेत गुंफली एकदाणी |
| -------- रावांचे नाव घेते ------- पंतांची
तान्ही |